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Ikshvaku Ke Vanshaj (Ram – Scion of Ikshvaku) & Sita – Mithila Ki Yoddha Hindi Paperback
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Description
| पैमाना / बिंदु | पुस्तक 1: राम (इक्ष्वाकुओं के वंशज) | पुस्तक 2: सीता (मिथिला की योद्धा) |
| मुख्य पात्र | राम (अयोध्या के प्रताड़ित और बहिष्कृत राजकुमार) | सीता (मिथिला की गोद ली हुई उपेक्षित अनाथ राजकुमारी) |
| काल और पृष्ठभूमि | 3400 ईसा पूर्व, भारत (अयोध्या, जो युद्ध और आंतरिक विभाजनों से कमजोर हो चुकी है) | 3400 ईसा पूर्व, भारत (मिथिला, एक कमजोर और उपेक्षित राज्य) |
| मुख्य समस्या / संकट | रावण द्वारा व्यापार के जरिए सप्त सिंधु का आर्थिक शोषण, गरीबी, भ्रष्टाचार और राम पर समाज द्वारा लादे गए कलंक। | व्यापक विभाजन, द्वेष, गरीबी, भ्रष्ट अभिजात वर्ग और रावण का बढ़ता प्रभाव। |
| मूल थीम और सफर | एक ऐसे राजकुमार की कहानी जो समाज के विरोध और प्रताड़ना के बावजूद कानून और मर्यादा के लिए डटा रहता है और ‘विष्णु’ बनने की अपनी नियति की ओर बढ़ता है। | एक अनाथ लड़की के प्रधानमंत्री बनने और अंततः एक ‘देवी’ के रूप में प्रतिष्ठित होने के संघर्ष की साहसिक गाथा। |
| साथी और संबंध | उनके भाई, उनकी जीवनसंगिनी सीता और उनका न्याय के प्रति अटूट प्रेम। | मिथिला का शासन, मजबूत नेतृत्व और आने वाले महाकाव्य की नींव। |
| शृंखला में स्थान | यह ‘रामचंद्र सीरीज़’ की पहली पुस्तक है (शुरुआत)। | यह ‘रामचंद्र सीरीज़’ की दूसरी पुस्तक है (जो समय में थोड़ा पीछे ले जाती है)। |
Additional information
| Weight | 0.5 lbs |
|---|---|
| Dimensions | 20 × 16 × 5 in |
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Original price was: ₹699.00.₹499.00Current price is: ₹499.00.












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